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Sunday, 30 January 2022

महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे, 30 जनवरी 1948 की घटना

 महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे, 30 जनवरी 1948 की घटना 





अपने अंतिम दिनों में गांधी इस हद तक अपनी मौत का पूर्वानुमान लगा रहे थे कि लगता था कि वो ख़ुद अपनी मौत के षडयंत्र का हिस्सा हैं.


20 जनवरी को जब उनकी हत्या का पहला प्रयास किया गया उसके बाद से अगले दस दिनों तक उन्होंने अपनी बातचीत, पत्रों और प्रार्थना सभा के भाषणों में कम से कम 14 बार अपनी मृत्यु का ज़िक्र किया.


21 जनवरी को उन्होंने कहा, "अगर कोई मुझ पर बहुत पास से गोली चलाता है और मैं मुस्कुराते हुए, दिल में राम नाम लेते हुए उन गोलियों का सामना करता हूं तो मैं बधाई का हक़दार हूं."


अगले दिन उन्होंने कहा कि "ये मेरा सौभाग्य होगा अगर ऐसा मेरे साथ होता है."


29 जनवरी, 1948 की शाम राजीव गांधी को लिए इंदिरा गांधी, नेहरू की बहन कृष्णा हठीसिंह, नयनतारा पंडित और पद्मजा नायडू गांधी से मिलने बिरला हाउस गए थे.


कैथरीन फ़्रैंक इंदिरा गांधी की जीवनी में लिखती हैं, "घर से निकलने से पहले इंदिरा गांधी को माली ने बालों में लगाने के लिए चमेली के फूलों का एक गुच्छा दिया. इंदिरा ने तय किया कि वो उसे गांधीजी को देंगी. बिरला हाउस में वो लोग लॉन में बैठे हुए थे जहां गांधी एक कुर्सी पर बैठे धूप सेंक रहे थे."


वो लिखती हैं, "चार साल के राजीव थोड़ी देर तो तितलियों के पीछे दौड़ते रहे लेकिन फिर गांधी के पैरों के पास आकर बैठ गए और इंदिरा के लाए चमेली के फूलों को उनके पैरों की उंगलियों में फंसाने लगे. गांधी ने हंसते हुए राजीव के कान पकड़ कर कहा, 'ऐसा मत करो. सिर्फ़ मरे हुए व्यक्तियों के पैरों में फूल फंसाए जाते हैं."


तड़के शुरू हुआ गांधीजी का दिन

30 जनवरी, 1948 को गांधी हमेशा की तरह सुबह साढ़े तीन बजे उठे. उन्होंने सुबह की प्रार्थना में हिस्सा लिया.


इसके बाद उन्होंने शहद और नींबू के रस से बना एक पेय पिया और दोबारा सोने चले गए. जब वो दोबारा उठे तो उन्होंने ब्रजकृष्ण से अपनी मालिश करवाई और सुबह आए अख़बार पढ़े.


इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के भविष्य के बारे में लिखे अपने नोट में थोड़ी तब्दीली की और रोज़ की तरह आभा से बांग्ला भाषा सीखने की अपनी मुहिम जारी रखी.


नाश्ते में उन्होंने उबली सब्ज़ियां, बकरी का दूध, मूली, टमाटर और संतरे का जूस लिया.


उधर शहर के दूसरे कोने में सुबह सात बजे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के छह नंबर वेटिंग रूम में जब नारायण आप्टे और विष्णु करकरे पहुंचे, उस समय तक नाथूराम गोडसे जाग चुके थे.


बुर्का पहनकर जाने का प्रयोग फेल हुआ




डॉमिनिक लैपिएर और लैरी कॉलिंस अपनी किताब 'फ़्रीडम ऐट मिडनाइट' में लिखते हैं, "किसी ने सुझाव दिया कि नाथूराम एक बुर्का पहन कर गांधीजी की प्रार्थना सभा में जाएं. बाज़ार से एक बड़ा-सा बुर्का भी ख़रीदा गया. जब नाथूराम ने उसे पहन कर देखा तो उन्हें महसूस हुआ कि ये युक्ति काम नहीं करेगी. उनके हाथ ढीले-ढाले बुर्के की तहों में फंस कर रह जाते थे."


"वो बोले- ये पहन कर तो मैं अपनी पिस्तौल ही नहीं निकाल पाउंगा और औरतों के लिबास में पकड़ा जाउंगा तो उसकी वजह मेरी ताउम्र बदनामी होगी, सो अलग. आख़िर में आप्टे ने कहा कभी-कभी सीधा साधा तरीक़ा ही सबसे अच्छा होता है."


"उन्होंने कहा कि नाथूराम को फ़ौजी ढंग का स्लेटी सूट पहना दिया जाए जिसका उन दिनों बहुत चलन था. वो लोग बाज़ार गए और नाथूराम के लिए वो कपड़ा ख़रीद लाए. नाथूराम गोडसे ने अपनी बेरेटा पिस्तौल निकाली और उसमें सात गोलियाँ भरीं."


सरदार पटेल गांधी से मिलने पहुंचे

उधर डरबन के महात्मा गांधी के पुराने साथी रुस्तम सोराबजी सपरिवार उनसे मिलने आए थे. उसके बाद वो दिल्ली के मुस्लिम नेताओं मौलाना हिफ़्ज़ुर रहमान और अहमद सईद से मिले. उन्हें उन्होंने आश्वस्त किया कि उन लोगों की सहमति के बिना वो वर्धा नहीं जाएंगे.


दोपहर बाद गांधी से मिलने कुछ शरणार्थी, कांग्रेस नेता और श्रीलंका के एक राजनयिक अपनी बेटी के साथ आए. उनसे मिलने वालों में इतिहासकार राधा कुमुद मुखर्जी भी थे.


गांधी से मिलने आने वालों में सबसे ख़ास शख्स थे सरदार पटेल जो साढ़े चार बजे वहां पहुंचे.


दूसरी तरफ़ समय काटने के लिए गोडसे और उनके साथी प्रतीक्षा कक्ष में चले गए.


डॉमिनिक लैपिएर और लैरी कॉलिंस लिखते हैं, "नाथूराम ने कहा, मेरा जी मूँगफली खाने का कर रहा हैं. आप्टे मूँगफली ख़रीदने चले गए. थोड़ी देर बाद वापस आकर उन्होंने कहा कि मूँगफली तो पूरी दिल्ली में कहीं नहीं मिल रही है, क्या काजू या बादाम से काम चल जाएगा?"


"इस पर नाथूराम ने कहा- मुझे सिर्फ़ मूँगफली चाहिए. आप्टे एक बार फिर मूँगफली की खोज में बाहर चले गए. थोड़ी देर बाद वो एक बड़े से थैले में मूँगफली लेकर आए. नाथूराम बड़े चाव से जल्दी-जल्दी मूँगफली खाने लगे."


इतने में चलने का समय हो गया.


बिरला हाउस जाने से पहले सभी बिरला मंदिर गए

तय हुआ कि गोडसे और उनके साथी पहले बिरला मंदिर जाएंगे. करकरे और आप्टे वहां भगवान के दर्शन और प्रार्थना करना चाहते थे. गोडसे को इस तरह की बातों में कोई दिलचस्पी नहीं थी.


मनोहर मुलगाँवकर अपनी क़िताब 'द मैन व्हू किल्ड गाँधी' में लिखते हैं, "करकरे जो भी शब्द कहने की कोशिश करते उनकी आवाज़ कांपने लगती. आप्टे उन्हें घूरकर संयत रहने की सलाह देते. गोडसे मंदिर के पीछे वाले बाग में जाकर आप्टे और करकरे की राह देखने लगे. ये दोनों जूते उतार कर नंगे पांव मंदिर के अंदर गए और वहां उन्होंने मंदिर में लगा पीतल का घंटा बजाया."


"जब ये लोग बाहर आए तो नाथूराम गोडसे शिवाजी की मूर्ति के पास खड़े थे. उन्होंने इन दोनों से पूछा कि क्या वो दर्शन कर आए? उन्होंने कहा-हाँ. इस पर नाथूराम बोले- मैंने भी दर्शन कर लिए."


बिरला हाउस में गोडसे की तलाशी नहीं हुई

वहां से नाथूराम गोडसे ने बिरला हाउस के लिए एक तांगा किया. नाथूराम के जाने के पांच मिनट बाद आप्टे और करकरे भी एक अलग तांगा कर बिरला हाउस पहुंच गए.


बाद में करकरे ने डॉमिनिक लैपिएर और लैरी कॉलिंस को बताया, "हमने राहत भरी सांस ली जब बिरला हाउस के फाटक पर हमें किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा."


उन्होंने बताया, "वहां पहले से अधिक तादाद में संतरी ज़रूर तैनात थे लेकिन कोई अंदर जाने वालों की तलाशी नहीं ले रहा था. हम टहलते हुए जब बगीचे में पहुंचे तो हमने देखा कि नाथूराम भीड़ में लोगों के बीच घुलमिल कर खड़े थे. हम भी उनके दोनों ओर जा कर खड़े हो गए. न उन्होंने हमारी तरफ़ देखा न हमने उनकी तरफ़."



गोडसे ने नज़दीक से गांधी पर तीन फ़ायर किए




उधर गांधी और पटेल के बीच पटेल और नेहरू के बीच के बढ़ते मतभेदों पर चर्चा हो रही थी. ये चर्चा इतनी गहरी और गंभीर थी कि गांधी को अपनी प्रार्थना सभा में जाने के लिए देर हो गई.


इस बातचीत के दौरान जैसा कि उनकी आदत थी, गांधी लगातार सूत कातते रहे. 5 बजकर 15 मिनट पर वो बिरला हाउस से निकलकर प्रार्थना सभा की ओर जाने लगे.


उन्होंने अपने हाथ अपनी भतीजियों आभा और मनु के कंधों पर टिका रखे थे. चूंकि उन्हें देर हो गई थी, इसलिए उन्होंने प्रार्थना स्थल जाने के लिए शॉर्टकट लिया.


राम चंद्र गुहा अपनी किताब 'गांधी द इयर्स दैट चेंज्ड द वर्ल्ड' में लिखते हैं, "गांधी प्रार्थनास्थल के लिए बने चबूतरे की सीढ़ियों के पास पहुंचे ही थे कि, ख़ाकी कपड़े पहने हुए नाथूराम गोडसे उनकी तरफ़ बढ़े. उनके हावभाव से लग रहा था जैसे वो गांधी के पैर छूना चाह रहे हों."


वो लिखते हैं, "आभा ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने आभा को धक्का दे दिया और उनके हाथ से गांधी की नोटबुक, थूकदान और तस्बीह छिटक कर ज़मीन पर आ गिरे. तभी गोडसे ने अपनी पिस्तौल निकाल कर गांधी पर पॉइंट ब्लैंक रेंज से लगातार तीन फ़ायर किए. एक गोली गांधी के सीने में और दो गोली उनके पेट में लगी."


"गांधी ज़मीन पर गिरे और उनके मुंह से निकला 'हे राम.' ख़ून से भीगी उनकी धोती में मनु को गांधी की इंगरसोल घड़ी दिखाई दी. उस समय उस घड़ी में 5 बज कर 17 मिनट हुए थे. गांधी के गिरते ही सुशीला नैयर की एक सहयोगी डॉक्टर ने गांधी का सिर अपनी गोद में रख लिया."



राम चंद्र गुहा लिखते हैं, "उनके शरीर से जान पूरी तरह निकली नहीं थी. उनका शरीर गर्म था और उनकी आंखें आधी मुंदी हुई थीं. उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वो गांधी को मृत घोषित कर दें, लेकिन अंदर ही अंदर वो महसूस कर पा रही थीं कि गांधी अब इस दुनिया में नहीं है."


गुहा लिखते हैं, "सरदार पटेल, गांधी से मिलकर अपने घर पहुंचे ही थे कि उन्हें गांधी पर हुए हमले की ख़बर मिली. वो तुरंत अपनी बेटी मणिबेन के साथ वापस बिरला हाउस पहुंचे. उन्होंने गांधी की कलाई को इस उम्मीद के साथ पकड़ा कि शायद उनमें कुछ जान बची हो. वहां मौजूद एक डॉक्टर बीपी भार्गव ने एलान किया कि गांधी को इस दुनिया से विदा लिए 10 मिनट हो चुके हैं."


"ठीक 6 बजे रेडियो पर बहुत सोचसमझ कर तैयार की गई घोषणा सुनकर भारत के लोगों को पता चला कि जिस सीधेसादे कोमल स्वभाव के शख़्स ने उन्हें आज़ादी दिलाई थी, वो इस दुनिया को अलविदा कह चुका था समाचार बुलेटिन में बार-बार दोहराया गया कि उनको मारने वाला व्यक्ति हिंदू था."


भीड़ ने नाथूराम गोडसे पर किया छड़ियों से वार

नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे अपनी किताब 'गांधी वध और मैं' में लिखते हैं, "गोलियां छोड़ते ही अपना पिस्तौल वाला हाथ ऊपर उठा कर नाथूराम चिल्लाए पुलिस... पुलिस. लेकिन आधा मिनट बीतने पर भी कोई उनके पास नहीं आया."


"तभी एक वायुसैनिक अधिकारी की नज़रें उनसे मिली. आंखों ही आंखों में गोडसे ने उन्हें अपने निकट आने के लिए कहा. उसने आकर नाथूराम की कलाई ऊपर ही ऊपर पकड़ ली. उसके बाद कई लोगों ने उन्हें घेर लिया. कुछ ने उन्हें पीटा भी."


"एक उत्तेजित व्यक्ति ने पिस्तौल को नाथूराम के सामने करते हुए कहा कि मैं इसी पिस्तैल से तुम्हें मार डालूंगा. नाथूराम ने जवाब दिया- बहुत खुशी से, लेकिन ऐसा नहीं प्रतीत होता कि पिस्तौल को संभालने का ज्ञान तुम्हें है. उसका सेफ़्टीकैच खुला है. ज़रा-सा धक्का लग जाने से तुम्हारे हाथों दूसरा कोई मर जाएगा."


गोपाल गोडसे लिखते हैं, "बात वहां खड़े पुलिस अधिकारी की समझ में आ गई. उसने तुरंत पिस्तौल अपने हाथ में लेकर उसका सेफ़्टीकैच बंद कर उसे अपनी जेब में रख लिया. उसी समय कुछ लोगों ने नाथूराम पर छड़ियों से वार किए जिससे उनके माथे से खून बहने लगा."


गोडसे बोले- कोई रंज नहीं

गांधी की मौत की ख़बर सुनकर वहां सबसे पहले पहुंचने वालों में से एक थे मौलाना आज़ाद और देवदास गांधी. उसके तुरंत बाद नेहरू, पटेल, माउंटबेटन, दूसरे मंत्री और सेनाध्यक्ष जनरल रॉय बूचर वहां पहुंचे.


वीआईपी लोगों के आगमन के बीच हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार के एक संवाददाता तुगलक रोड पुलिस स्टेशन पहुंच गए.


31 जनवरी, 1948 को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में उन्होंने लिखा, "गांधी के हत्यारे नाथूराम को एक अंधेरे, बिना लाइट के एक कमरे में बंद किया गया था. उसके माथे से ख़ून निकल रहा था और उसके चेहरे का बायां हिस्सा ख़ून से भरा हुआ था. जब मैं कमरे में घुसा तो हत्यारा अपनी जगह से उठ गया. जब मैंने उससे पूछा कि तुम्हें इस बारे में कुछ कहना है तो उसका जवाब था, मैंने जो कुछ भी किया है उसका मुझे कतई दुख नहीं है. बाहर निकलते हुए मैंने पुलिस वाले से पूछा कि नाथूराम के पास पिस्तौल के अलावा क्या मिला तो उसका जवाब था, 400 रुपये."


रात 2 बजे ठंडे पानी से गांधी के पार्थिव शरीर को नहलाया गया

रात को दो बजे जब भीड़ थोड़ी छंटी तो गांधी के साथी उनके पार्थिव शरीर को बिरला हाउस के अंदर ले आए. गांधी के शव के स्नान करने की ज़िम्मेदारी ब्रजकृष्ण चाँदीवाला को दी गई.


चाँदीवाला पुरानी दिल्ली के एक परिवार से आते थे और 1919 से ही जब उन्होंने पहली बार गांधी को अपने सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज में बोलते हुए सुना, उस दिन से ही उन्होंने ख़ुद को गांधी की सेवा में लगा लिया था.


ब्रजकृष्ण चाँदीवाला ने गांधी के रक्तरंजित कपड़े उतार कर उनके बेटे देवदास गांधी के हवाले किए. उन कपड़ो में उनकी ऊनी शॉल भी थी जिसमें गोलियों से तीन छेद बन गए थे. ख़ून बहने से उनके कपड़े उनके जिस्म से चिपक गए थे.


बाद में ब्रजकृष्ण ने अपनी किताब 'एट द फ़ीट ऑफ़ गांधी' में लिखा, "बापू का निर्जीव शरीर लकड़ी के तख़्ते पर रखा हुआ था. मैंने उसे नहलाने के लिए टब से लोटे में ठंडा पानी भरा और बापू के शरीर पर डालने के लिए अपना हाथ बढ़ाया."


"तभी अचानक अपने आप ही मेरे हाथ रुक गए, बापू ने कभी भी ठंडे पानी से स्नान नहीं किया था. उस समय रात के दो बज रहे थे. जनवरी की रात की ज़बरदस्त ठंड थी. मैं किस तरह वो बर्फ़ीला पानी बापू को शरीर पर डाल सकता था?"


"मेरे टूटे हुए दिल से एक आह-सी निकली और मैं अपने आँसुओं को नहीं रोक पाया. लेकिन फ़िर मैंने उसी ठंडे पानी से बापू को नहलाया. मैंने उनके शरीर को पोंछा और वही कपड़ा उन्हें पहना दिया जो मैंने उनके पिछले जन्मदिन पर उनके लिए ख़ुद काता था. मैंने उनके गले में सूत की बिनी हुई माला भी पहनाई और मनु ने उनके माथे पर तिलक लगाया."


250 भारतीय सैनिकों ने गांधी के पार्थिव शरीर को खींचा

अगले दिन गांधी के पार्थिव शरीर को एक खुले डॉज वाहन में रखा गया. उनके पैरों के पास सरदार पटेल बैठे हुए थे जबकि नेहरू उनके सिर के पास बैठे हुए थे. उस वाहन में गांधी के पुराने साथी राजकुमारी अमृत कौर और जेबी कृपलानी भी सवार थे.


बिरला हाउस से गांधी की शव यात्रा पहले बांए मुड़ी और फिर दाहिने मुड़ते हुए इंडिया गेट की तरफ़ बढ़ चली. शायद पहली बार लोगों को इंडिया गेट की दीवार पर चढ़ कर महात्मा गांधी की शवयात्रा को देखते हुए देखा गया.


माउंटबेटन के निजी सचिव एलन कैंपबेल जॉन्सन ने अपनी किताब 'मिशन विद माउंटबेटन' में लिखा, "अंग्रेज़ी राज को भारत से हटाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले महात्मा गांधी को उनकी मृत्यु पर भारत के लोगों से ऐसी श्रंद्धांजलि मिल रही थी जिसके बारे में कोई वायसराय कल्पना भी नहीं कर सकते थे."


जब गांधी की शवयात्रा दिल्ली गेट के पास पहुंची तो तीन डकोटा विमानों ने नीचे उड़ान भरते हुए राष्ट्रपिता को सलामी दी. बाद में अनुमान लगाया गया कि महात्मा गांधी की शवयात्रा में कम से कम 15 लाख लोगों ने भाग लिया.


मशहूर फ़ोटोग्राफ़र मार्ग्रेट बर्के वाइट ने जब अपने लाइका कैमरे के लेंस को फ़ोकस किया तो उनके ज़हन में आया कि वो शायद धरती पर जमा होने वाली सबसे बड़ी भीड़ को अपने कैमरे में कैद कर रही हैं.


अंत्येष्ठि स्थल से 250 मीटर पहले डॉज गाड़ी का इंजन बंद कर दिया गया और भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के 250 जवान चार रस्सों की मदद से गाड़ी को खींच कर उस स्थान पर ले गए जहां गांधी की चिता में आग लगाई जानी थी.


आकाशवाणी के कमेंटेटर मेलविल डिमैलो ने लगातार सात घंटे तक माहात्मा गांधी की शवयात्रा का आंखों देखा हाल सुनाया. जब कमेंट्री समाप्त हो गई तो वो अपनी ओबी वैन पर बैठे अपनी थकान मिटा रहे थे. तभी उन्होंने देखा कि एक हाथ उनकी वैन के हुड के कोने को पकड़ने की कोशिश कर रहा था. जब डिमैलो ने ग़ौर से देखा तो उन्होंने पाया कि वो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे.


उन्होंने बताया था, "मैंने अपने हाथ का सहारा देकर उन्हें अपनी वैन की छत पर खींच लिया. नेहरू ने मुझसे पूछा क्या तुमने गवर्नर जनरल को देखा है? मैंने कहा वो आधे घंटे पहले यहां से चले गए. फिर नेहरू ने पूछा क्या तुमने सरदार पटेल को देखा है? मैंने जवाब दिया वो भी गवर्नर जनरल के जाने के कुछ मिनटों बाद चले गए थे. तभी मुझे महसूस हुआ कि उस अफ़रा-तफ़री में कई लोग अपने दोस्तों को खो बैठे थे."



जब आग के हवाले किया गया पार्थिव शरीर

गांधी की अंत्येष्ठि में 15 मन चंदन की लकड़ी, 4 मन घी और 1 मन नारियल का इस्तेमाल किया गया. जैसे ही शाम के धुंधलके में गांधी की चिता से लाल लपटें उठी वहां मौजूद लाखों लोग एक स्वर में कह उठे 'महात्मा गांधी अमर रहें.'


बर्नाड शॉ ने गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "ये दिखाता है कि अच्छा होना कितना ख़तरनाक है."


पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने अपने शोक संदेश में लिखा, "वो हिंदू समुदाय के महानतम लोगों में से एक थे."


जब उनके एक साथी ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि गांधी का योगदान एक समुदाय से कहीं ऊपर उठ कर था, तब भी जिन्ना ने अपने विचार नहीं बदले और कहा, 'दैट वॉज़ वाट ही वाज़, अ ग्रेट हिंदू."


जिन्ना के नंबर दो लियाक़त अली ने ज़रूर कहा, "गांधी हमारे समय के महान व्यक्ति थे."


पाकिस्तान टाइम्स ने लिखा, "गांधी भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे चाहे जाने वाले और सम्मानित राजनीतिक नेता थे."


उस समय पाकिस्तान टाइम्स के संपादक फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने लिखा, "गांधी का जाना भारत के लोगों के साथ पाकिस्तान के लोगों के लिए भी उतनी ही बुरी ख़बर है."




Source: BBC NEWS

Sunday, 28 November 2021

Kanpur Gutka Man

 

Kanpur guthka man: जभऊ गुटखा खाते पकड़ाओ, तो बहाना रेडीमेड है- सुपारी खा रहे थे!

कानपुर के माहेश्वरी मोहाल में रहने वाले शोभित पांडेय नाम के ये महानुभाव भारत-न्यूजीलैंड टेस्ट मैच के दौरान टीवी स्क्रीन पर कथित रूप से गुटखा चबाते नजर आए थे. दूसरे दिन भी मैच देखने पहुंचे शोभित पांडेय ने अपने वायरल हो रहे वीडियो पर सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें बेवजह बदनाम किया जा रहा है. वो गुटखा नहीं सुपारी खा रहे थे.



कानपुर टेस्ट मैच के पहले ही दिन सोशल मीडिया पर 'गुटखा मैन ऑफ द मैच' निर्विवाद रूप से शोभित पांडेय को घोषित कर दिया गया. कानपुर के माहेश्वरी मोहाल के रहने वालेशोभित टेस्ट मैच के दौरान टीवी स्क्रीन पर कथित रूप से गुटखा चबाते नजर आए थे. गुटखा खाने को कथित रूप से लिखने की वजह भी ये भाईसाहब ही बने हैं. दरअसल, कानपुर टेस्ट दूसरे दिन मैच देखने पहुंचे शोभित पांडेय ने अपने वायरल हो रहे वीडियो पर सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें बेवजह बदनाम किया जा रहा है. वो गुटखा नहीं सुपारी खा रहे थे. जैसे बच्चे कोई गलती करते हुए पकड़े जाते हैं, तो उनके बहाने जितने सरल और मन को छूने वाले होते हैं. कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में गुटखा चबाने वाले शोभित पांडेय का भी बहाना उतना ही मासूम नजर आता है.


मतलब पता चला कि गुरू...टीवी पर आ गए हैं और जनता ने सब देख लिया है. तो, पापा की मार की डर से सारी बकैती दो मिनट में फुस्स हुई गई. कहने का अर्थ है कि अरे यार...जित्ती रंगबाजी से VIP पैवेलियन का 5000 रुपइया का टिकट लेने के बाद वहां बैठकर गुटखा खा रहे थे. टीवी पर वायरल होने के बाद काहे डर रहे हो. डर भी इस दर्जे का का दूसरे दिन ग्रीन पार्क स्टेडियम केवल ये बताने पहुंच गए कि गुटखा खाना गलत बात है. ये कोई स्पेशल बात तो थी नहीं, जो ऐसी चीज बताने स्टेडियम पहुंच गए. गुटखे के पाउच के साथ मिलने वाली पुड़िया पर फोटो के साथ बोल्ड अक्षरों में ये लिखा ही रहता है.


उनके इस बयान के बाद गुटखा खाने वाले लोगों की बीच सुपारी बहस का मुद्दा बन गई है. तमाम तरह के तर्कों के साथ गुटखा एक्सपर्ट्स इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि यार...सुपारी खाने वाला कोई आदमी इस तरह का मुंह बनाता ही नहीं है. अखिल भारतीय गुटखा प्रेमी संघ के अध्यक्ष पिंकू तिवारी ने इस बारे अपनी राय रखते हुए कहा है कि गुटखा खाने के बाद मुंह में जो पीक भरी रहती है, उसे निगलने पर आमतौर पर कोई समस्या नहीं होती है. लेकिन, इस मामले में को देखकर यही लगता है कि शोभितवा जो है, वो गुटखा खाना हाल-फिलहाल में ही सीखा होगा. वरना हमारे जैसे पेशेवर लोग तो ऐसे मामलों में एक बार में गटक जाते हैं. कैमरे देखने के बाद भी गुटखे की पीक न निगल पाना यही साबित करता है कि गुटखा खाने में वो नया खिलाड़ी ही होगा. लेकिन, इस बात की संभावना नहीं है कि वो सुपारी खा रहा था. खा तो वो 100 फीसदी गुटखा ही रहा था. क्योंकि, सुपारी खाने वाला शख्स साथ ही साथ पीक निगलता जाता है. लेकिन, मुंह में इतना सारा पीक भरना केवल सुपारी के सहारे नहीं किया जा सकता है.



वहीं, सबजन गुटखाखोर संघ के अध्यक्ष दिनेश लखेतर का कहना है कि सबसे पहले तो ग्रीन पार्क स्टेडियम के VIP पैवेलियन में थूकने की व्यवस्था करवाई जानी चाहिए. अगला आदमी इतना पैसा खर्च कर टिकट ले रहा है, उस पर तमाम सिक्योरिटी को धता बताते हुए गुटखा अंदर तक लिए जा रहा है, तो बीसीसीआई को भी गुटखाप्रेमियों के बारे में सोचना चाहिए. और, रही बात शोभित पांडेय के सुपारी खाने की, तो वो सौ फीसदी झूठ बोल रहा है. मुंह में गुटखा और उसके रस को भरे हुए वायरल होने के बाद घर में पिताजी सौ परसेंट कूटेंगे. इसी डर से लड़का जो है, दूसरे दिन अपनी छवि सुधारने वहां सुपारी खाने की बात कहने गया है. वरना कानपुर पुलिस ढूंढ रही हो और आदमी पकड़े जाने वाली जगह पहुंच जाएगा. ऐसा हो ही नहीं सकता है. पिताजी के चप्पल के प्रभाव में ही कोई शख्स दोबारा शेर के मांद में जाने की हिम्मत कर सकता है. क्योंकि, पुलिस की दो लठियां पड़ने के बाद आदमी उछला-उछला घूमता है.


कनपुरिया गुटखा प्रेमी संघ के अध्यक्ष सुमित ने इस बारे में एक्सपर्ट राय देने से पहले मुंह में भरा गुटखा थूकते हुए कहा कि देखो गुरू...बहुत ज्ञान की बात बताने जा रहे हैं, तभी गुटखा थूका है. वरना इत्ती देर से मुंह में भरे बैठे थे, चूं तक नहीं किया है. तो, ध्यान से सुनो. शोभितवा जो पुड़िया खा रहा होगा, उसमें तंबाकू की मात्रा ज्यादा रहा होगी. क्योंकि, ज्यादा तंबाकू मिले हुए गुटखे को शुरुआती दौर में ही निगलने पर हिचकी आने लगती है. जब तक मुंह पूरा गुब्बारे ऐसा न फूल जाए, तब तक अगर गुटखा को जरा सा भी गटकने का प्रयास किया, तो हिचकियां शुरू हो जाएंगी. तो अगले आदमी ने सोचा होगा कि मुंह का मामला ताजा है, तो रिस्क नहीं लिया जा सकता है. इसी चक्कर में उसने पीक को गटका नहीं होगा. वरना हिचकियां चालू हो जातीं. पुलिस वैसे ही खाने-पीने का सामान अंदर नहीं लिए जाने दे रही है. और, स्टेडियम में पानी की बोतल 200 रुपया की बिक रही है, तो शोभितवा मुंह में पीक भरे-भरे ही टीवी स्क्रीन पर वेव करने लगा होगा. 



एक अन्य कनपुरिया गुटखा प्रेमी अजीत का कहना है कि लोग सुपारी-गुटखा को लेकर दुनियाभर की बातें कर रहे हैं. लेकिन, कोई ये बात कर ही नहीं रहा है कि हमारा शोभितवा जो है, वो स्वच्छ भारत अभियान को कित्ते अच्छे तरीके से प्रचारित कर रहा है. अगला बंदा चाहता तो इधर-उधर कहीं भी पीक मार के जमीन लाल कर देता. लेकिन, उसने स्वच्छ भारत अभियान में पलीता लगाने से अच्छा कैमरे पर मुंह में गुटखा भरे आना चुना. देशहित में इतना बड़ा बलिदान आखिर कौन देता है. और, अगर वो सुपारी खा रहा था, तो ये कोई अपराध थोड़े ही है. गुटखा का विज्ञापन तो अमिताभ बच्चन से लेकर ऋतिक रोशन तक कर रहे हैं. उन्हें कोई क्यों नहीं रोकता है. ये कानपुर को बदनाम करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश है. कानपुर के बारे में बात करने के लिए उसके स्वर्णिम क्रांतिकारी इतिहास से लेकर इस शहर की उद्यमशीलता तक को लेकर सुर्खियां बनाई जा सकती हैं. लेकिन, साजिश के तहत कानपुर की पहचान के साथ गुटखा को फेवीकॉल के ऐसे मजबूत जोड़ से चिपका दिया गया है कि क्या ही कहा जाए?


इस वीडियो के वायरल होने के बाद दूसरे दिन ग्रीन पार्क मैच देखने पहुंचे शोभित पांडेय ने कुछ मीडिया चैनलों से बातचीत की है. उनका कहना है कि मैं गुटखा खाता हूं. लेकिन, उस दिन नहीं खा रहा था. गुटखा खाने वाले को उलझन मचती है. इसी चक्कर में बहन के पर्स में पड़ी मीठी सुपारी खा ली थी. उनका कहना है कि मजाक करना ठीक है. लेकिन, अब थोड़ा ज्यादा हो रहा है. वैसे, शोभित पांडेय का गुस्सा करना जायज है. लोग फालतू में ही जज कर रहे हैं. भाई ज्यादा समस्या है, तो पुलिस से मामले की जांच करा लो. तुरंत सुपारी की सुपारी और गुटखा का गुटखा हो जाएगा.


#कानपुर, #गुटका, #बहाना, Kanpur, Guthka Man, Ind Vs New Zealand

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

Monday, 22 November 2021

Mathematics Quiz set- 1

Jawahar Navodaya Vidyalaya Selection Test 2022 Class 6 

Quiz Test : Mathematics


1. 17/3 + 13/3 = ?





ANSWER= (A) 10
Explain:-

 

1.9/2 + 2/3 – ¾ + 1/6 – 3/8 = ?





ANSWER= (A) 101/24
Explain:-

 

3. 85/18 × 3/17 को ½ × 5/9 से भाग दे |





ANSWER= (D) 3
Explain:-

 

4. 1 – ( ½ - 1/3 + ¼ ) का मान बताएं |





ANSWER= (A) 1/12
Explain:-

 

5. सरल करें (Simplify) : 1-[1/2 – {1/3 + (1/4 – 1/8 )}]





ANSWER= (A) 23/24
Explain:-

 

6. किसी धन का ¼ भाग उसके 1/5 भाग से 20 रू अधिक है, तो धन बताएं |





ANSWER= (A) Rs 400
Explain:-

 

7. दो भिन्नों का योग 33/4 एवं उनका अन्तर 17/8 हो , तो बड़ी भिन्न बताएं |





ANSWER= (B) 83/16
Explain:-

 

 

8. राम अपनी आय का 1/3 भाग खाने पर , 1/8 भाग कपड़े पर तथा 10 % दान पर खर्च करता है | यदि उसके पास रू 265 बचते है, तो उसकी आय ज्ञात करें ?





ANSWER= (C) Rs 600
Explain:-

 

 

9. एक खेत का 1/20 भाग पशुओं को चराने में और ¾ भाग खेती के लिए प्रयुक्त होता है | शेष 25 हेक्टेयर पर वन है , खेत का कुल क्षेत्रफल क्या है ?





ANSWER= (C) 125 Hectre
Explain:-

 

 

10. जब भिन्नों ½, ¼, 1/3, 1/6 को बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित किया जाएगा, तो वे होंगी –





ANSWER= (B) 1/6, ¼, 1/3, ½
Explain:-

 

 

11. किसी धन का 1/6 भाग उसके 1/8 भाग से रू 24 अधिक है , तो धन ज्ञात करें





ANSWER= (A) रू 576
Explain:-

 

 

12. किसी धन का ¾ भाग उसके 2/5 से रू 700 अधिक हिया, तो धन ज्ञात करें |





ANSWER= (D) रू 2000
Explain:-

 

 

13. यदि किसी संख्या के 2/5 और ¾ भाग का अंतर 56 है , तो वह संख्या क्या होगी ?





ANSWER= (B) 160
Explain:-

 

 

14. एक खम्भे का 1/3 भाग कीचड़ में, 2/5 भाग पानी में तथा 10 मीटर पानी के ऊपर हिया , तो खम्भे की लम्बाई बताएं |





ANSWER= (C) 75/2 मीटर
Explain:-

 

 

15. एक बर्तन दो-तिहाई पानी से भरा हुआ है| यदि इस बर्तन को पूरा भरने के लिए 50 लिटर पानी और चाहिए तो बर्तन की क्षमता क्या होगी ?





ANSWER= (A) 150 लीटर
Explain:-

 

 

16. दो संख्याओं का गुणनफल 5/4, यदि एक संख्या 5/6 हो, तो दूसरी संख्या ज्ञात करें |





ANSWER= (C) 3/2
Explain:-

 

 

17. 3/5 और 7/3 के व्युत्क्रमों के योग का व्युत्क्रम क्या होगा ?





ANSWER= (D) 21/44
Explain:-

 

 

18. वह संख्या क्या होगी जिसे 19/7 से गुणा करने पर गुणनफल 97/21 प्राप्त होगी |





ANSWER= (D) 97/57
Explain:-

 

 

19. किसी धन में उसका 1/7 जोड़ने पर रू 40 हो जाता है | वह धन ज्ञात करें |





ANSWER= (D) Rs 35
Explain:-

 

 

20. 5/4 +[5/2 ÷ {3/4 – ½ (2/3 – 1/6 – 1/12 ) } ]





ANSWER= (A) 305/52
Explain:-

Sunday, 14 November 2021

भारत की प्रमुख बहुउद्वेशीय परियोजनाएँ

Ajit Sir Online Coaching JJawahar Navodaya vidyalaya Selection Test class 6

Multipurpose river valley projects in India

भारत की प्रमुख बहुउद्वेशीय परियोजनाएं

क्र. सं

परियोजना का नाम

नदी

लाभान्वित राज्य

उद्वेश्य

1.

दामोदर घाटी नदी परियोजना

दामोदर नदी

झारखंड , प. बंगाल

बाढ़ नियन्त्रण , सिंचाई , विद्युत् उत्पादन

2.

भाखड़ा नांगल परियोजना

सतलज नदी

पंजाब , हरियाना राजस्थान

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

3.

व्यास परियोजना

व्यास नदी

पंजाब,हरियाणा , राजस्थान

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

4.

कोसी परियोजना

कोसी नदी

बिहार , नेपाल

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई, बाढ़ नियन्त्रण

5.

नर्मदा घाटी परियोजना

नर्मदा नदी

गुजरात,मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र ,राजस्थान

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

6.

माही परियोजना

मही नदी

गुजरात , राजस्थान

सिंचाई

7.

फरक्का बैराज परियोजना

हुगली नदी

प. बंगाल

सिंचाई , नाव परिवहन

8.

माताटीला परियोजना

बेतवा नदी

उत्तरप्रदेश , मध्यप्रदेश

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

9.

गंडक नदी परियोजना

गंडक नदी

बिहार, उत्तरप्रदेश

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

10.

थीन बाँध परियोजना

रावी नदी

पंजाब

सिंचाई

11.

रिहंद बाँध परियोजना

रिहंद नदी

उत्तर प्रदेश , मध्प्रदेश

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

12.

मयूराक्षी परियोजना

मयूराक्षी नदी

प. बंगाल

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

13.

चम्बल परियोजना

1. जवाहर सागर बाँध –राजस्थान

2. राणा प्रताप सागर बाँध –राजस्थान

3. गांधी सागर बाँध – मध्यप्रदेश

चंबल नदी

राजस्थान , मध्यप्रदेश

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई, मृदा संरक्षण

14.

हीराकुंड बाँध परियोजना

महानदी

ओड़िसा

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

15.

नाथपा –झाकरी परियोजना

सतलज नदी

हिमाचल प्रदेश

जल विद्युत

16.

तुंगभद्रा परियोजना

तुंगभद्रा नदी

कर्नाटक , आंधप्रदेश

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

17.

नागार्जुन सागर परियोजना

कृष्णा नदी

आंध्रप्रदेश

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

18.

कोयना परियोजना

कोयना

महाराष्ट्र

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

19.

रामगंगा परियोजना

रामगंगा

उत्तराखंड

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

20.

तिहरी बाँध  परियोजना

भागीरथी नदी

उत्तराखंड

जल विद्युत्

21.

सलाल परियोजना

चिनाब नदी

जम्मू -काश्मीर

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

22.

घाटप्रभा परियोजना

घाटप्रभा  नदी

कर्नाटक

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

23.

मालप्रभा  परियोजना

मालप्रभा  नदी

कर्नाटक

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

24.

पंचमपाद परियोजना

गोदावरी   नदी

आंध्रप्रदेश

सिंचाई

25.

अलमट्टी बाँध परियोजना

कृष्णा नदी

आंध्रप्रदेश , कर्नाटक , महाराष्ट्र

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

26.

मैटूर परियोजना

कावेरी नदी

तमिलनाडु

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

27.

श्री शैलम परियोजना

कृष्णा नदी

आंध्रप्रदेश

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

28.

इडुक्की परियोजना

पेरियार नदी

केरल

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

29.

निजाम सागर परियोजना

मंजरा नदी

आन्ध्रप्रदेश

जल विद्युत्

30.

शिव समुद्रम परियोजना

कावेरी

कार्नाटक

जल विद्युत्

31.

शरावती परियोजना

शरावती नदी

कर्नाटक

जल विद्युत्

32.

राजघाट परियोजना

बेतवा नदी

मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

33.

उकाई परियोजना

ताप्ती परियोजना

गुजरात

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

34.

स्वर्ण रेखा परियोजना

स्वर्ण रेखा

झारखंड

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

35.

कोयल कोरो परियोजना

कोयल नदी

झारखंड

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

36.

तवा परियोजना

तवा नदी

मध्य प्रदेश

सिंचाई

37.

छिबरो पन बिजली परियोजना

घाघरा नदी

उत्तर प्रदेश

जल विद्युत्

38.

पार्वती जल विद्युत् परियोजना

पार्वती नदी

हिमाचल प्रदेश ,हरियाणा ,दिल्ली

जल विद्युत्

39.

काकरापारा परियोजना

ताप्ती नदी

गुजरात

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

40.

पोंग बाँध परियोजना

व्यास नदी

हिमाचल प्रदेश

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

41.

दुलहस्ती परियोजना

चिनाब नदी

जम्मू-कश्मीर

जल विधुत

42.

तुलबुल परियोजना

झेलम नदी

जम्मू-काश्मीर

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई, जल परिवहन

43.

बगलीहार परियोजना

चिनाब नदी  

जम्मू-काश्मीर

जल-विद्युत्

44.

ऊरी परियोजना

झेलम नदी  

जम्मू-काश्मीर

जल विद्युत्

45.

तीस्ता परियोजना

तीस्ता नदी

सिक्किम

विद्युत् उत्पादन , बाढ़ नियन्त्रण

46.

पापनाशम परियोजना

ताम्र पर्णी नदी

तमिलनाडु

जलविद्युत

47.

पल्लीवासल परियोजना

मदिरापूजा नदी

केरल

जल  विद्युत

48.

थावर सिंचाई परियोजना

थान्वर  नदी

मध्य प्रदेश

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

49.

ओराई  परियोजना

ओराई नदी

राजस्थान

सिचाई

50.

रणजीत सागर बाँध परियोजना

रावी नदी

पंजाब

जल विद्युत्

51.

दुर्गापुर बैराज परियोजना

दामोदर नदी

प. बंगाल , झारखंड

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

52.

हिडकल परियोजना

घाट प्रभा नदी

कर्नाटक

जल विद्युत्

53.

कुंडा परियोजना

कुंडा नदी

तामिलनाडू

जल विद्युत् , सिंचाई

54.

कोलडैम परियोजना

सतलज नदी

हिमाचल प्रदेश

जल विद्युत्

55.

लक्ष्मी सागर बाँध  परियोजना

बेतवा नदी

उत्तर प्रदेश

विद्युत् उत्पादन , सिंचाई

 भारत और पड़ोसी देशों के साथ नदी परियोजना

क्र.सं.

परियोजना

नदी

देश

1.

चुखा जल विद्युत् परियोजना

वांगचू नदी

भारत-भूटान

2.

टाला परियोजना

वांगचू नदी

भारत-भूटान

3.

संकोश परियोजना

संकोश नदी

भारत-भूटान

4.

टनकपुर बाँध परियोजना

महाकाली नदी

भारत-नेपाल

5.

कोसी परियोजना

कोसी नदी

भारत- नेपाल

6.

पंचेश्वर परियोजना

महाकाली

भारत-नेपाल

7.

शारदा परियोजना

शारदा नदी

भारत- नेपाल

 भारत-पाकिस्तान के मध्य विवादित नदियाँ और जल विद्युत् परियोजनाएं

क्र.सं.

परियोजना

नदी

1.

दुलहस्ती परियोजना

चिनाब नदी

2.

सलाल परियोजना

चिनाब नदी

3.

किशनगंगा परियोजना

किशनगंगा नदी

4.

बगलीहार बाँध परियोजना

चिनाब नदी

5.

किरथई बाँध परियोजना

चिनाब  नदी

6.

सावाल कोट बाँध परियोजना

चिनाब नदी

 


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